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Monday, September 21, 2020

देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना


यदि तुम्हारे घर के

एक कमरे में आग लगी हो

तो क्या तुम

दूसरे कमरे में सो सकते हो?

यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में

लाशें सड़ रहीं हों

तो क्या तुम

दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?

यदि हाँ

तो मुझे तुम से

कुछ नहीं कहना है।


देश कागज पर बना

नक्शा नहीं होता

कि एक हिस्से के फट जाने पर

बाकी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहें

और नदियां, पर्वत, शहर, गांव

वैसे ही अपनी-अपनी जगह दिखें

अनमने रहें।

यदि तुम यह नहीं मानते

तो मुझे तुम्हारे साथ

नहीं रहना है।


इस दुनिया में आदमी की जान से बड़ा

कुछ भी नहीं है

न ईश्वर

न ज्ञान

न चुनाव

कागज पर लिखी कोई भी इबारत

फाड़ी जा सकती है

और जमीन की सात परतों के भीतर

गाड़ी जा सकती है।


जो विवेक

खड़ा हो लाशों को टेक

वह अंधा है

जो शासन

चल रहा हो बंदूक की नली से

हत्यारों का धंधा है

यदि तुम यह नहीं मानते

तो मुझे

अब एक क्षण भी

तुम्हें नहीं सहना है।


याद रखो

एक बच्चे की हत्या

एक औरत की मौत

एक आदमी का

गोलियों से चिथड़ा तन

किसी शासन का ही नहीं

सम्पूर्ण राष्ट्र का है पतन।


ऐसा खून बहकर

धरती में जज्ब नहीं होता

आकाश में फहराते झंडों को

काला करता है।

जिस धरती पर

फौजी बूटों के निशान हों

और उन पर

लाशें गिर रही हों

वह धरती

यदि तुम्हारे खून में

आग बन कर नहीं दौड़ती

तो समझ लो

तुम बंजर हो गये हो-

तुम्हें यहां सांस लेने तक का नहीं है अधिकार

तुम्हारे लिए नहीं रहा अब यह संसार।


आखिरी बात

बिल्कुल साफ

किसी हत्यारे को

कभी मत करो माफ

चाहे हो वह तुम्हारा यार

धर्म का ठेकेदार,

चाहे लोकतंत्र का

स्वनामधन्य पहरेदार।

Thursday, April 14, 2016

मेरी माँ

मेरे चेहरे पर घर कर चुके,
ज़िन्दगी के हज़ार रंगो से
गुमराह हुए बिना,
मेरी माँ,
मेरे भीतर झाँक लेती है,
मुझको जान लेती है,
मेरे मन की गहराई में
उतरने के लिए
उसे शब्दों की सीढ़ी,
भावों की रस्सी की
ज़रूरत नहीं पड़ती,
मेरी माँ,
मेरी ख़ामोशी पहचान लेती है।

मेरी माँ ने,
अक्सर
मेरी उलझनों को इत्मीनान से सुनकर
अपने हिस्से की नींद मुझे दी है,
मेरी परेशानियों को साँझा कर
मेरे कंधे को आराम दिया है,
मेरी नज़र उतारकर
'आम' हो चुके मुझको
'खास' होने का 
नायाब एहसास दिया है।

मेरी माँ,
मेरे लिए
संघर्षरत रहने की प्रेरणा है,
हिम्मत न हारने का हौसला है,
मुश्किलों से पार पाने की शक्ति है,
मेरी सफलता का आश्वासन है,
मेरी सबसे अच्छी दोस्त है,
मेरा सबसे भरोसेमंद सहारा है।

ज़िन्दगी के इस सफ़र में,
राह में जब भी कांटे आये
मेरी माँ ने अपनी हथेलियाँ बिछा दी,
जब भी धुप ज़रा तेज़ हुई
अपने आँचल की छाँव कर दी,
मैं जब भी लड़खड़ाया
हाथ देकर मुझे संभाला,
मेरे थकने पर
मुझे अपने कंधे का सहारा दिया,
ये मेरी माँ की
निरंतर कोशिशें ही थीं
जिन्होंने,
ये सफ़र थमने नहीं दिया
मुझे रुकने नहीं दिया
मुझे हारने नहीं दिया।



Sunday, January 24, 2016

वीकेंड


बेचारा वीकेंड, क्या क्या करता, किस किस के लिए करता, और कितना करता, उम्मीद भरी निगाहों से देखती , पूरी दुनिया में, किस किस की मुरादें पूरी करता, बेचारा वीकेंड। यहाँ आदमी, पांचो दिन खुद को घिसता है, दिन रात काम की चक्की में पिस्ता है, इस उम्मीद में कि एक दिन, उसका भी वीकेंड आएगा, इस वीकेंड का किस्सा भी, एक भारतीय बच्चे सा है, अपना कितना भी अच्छा निकल जाए, फिर भी, दुसरे का कैसा निकला, उससे तुलना ज़रूर की जाती है, अमूमन, और बेहतर होने की उम्मीद, हमेशा रखी जाती है। यहाँ वीकेंड पर, किसी को घर भागना है, किसी को यारों संग महफ़िल लगानी है, किसी को मेहबूबा को समय देना है, किसी को ज़रूरी काम निपटाने है, तो किसी को ढेर सारी मस्ती करनी है। ढेर सारी मस्ती, इसका भी अपना फ़साना है, आखिर इसका मतलब क्या है, वीकेंड अक्सर सोचा करता है, पूरा हफ्ता, लोगों के दिमाग में झाँका करता है, और, मस्ती के, अलग-अलग मतलब निकाला करता है, कोई पब डिस्को जा रहा है, कोई हुक्के का धुआँ उड़ा रहा है, कोई ब्रांडी व्हिस्की गटक रहा है, कोई गांजा मारकर लटक रहा है, कोई फिल्मों का स्टॉक निपटा रहा है, तो कोई मेहबूबा से इश्क़ फरमा रहा है। पर जब असलियत में वीकेंड आता है, तो, कोई पूरा दिन सोता है, कोई टीवी देखकर भयंकर बोर होता है, कोई वीकेंड कोचिंग जा रहा है, कोई सेल्फ-स्टडी में सर खपा रहा है, किसी को घर की सफाई करनी पड़ रही है, किसी को हफ्ते भर की ग्रॉसरी लानी पड़ रही है। सोमवार की सुबह, जब सब बेमन से उठा करते हैं, बिस्तर छोड़ा करते हैं, खुद से नज़र मिलाने से डरते हैं, तो वो अक्सर, खुद को बख्श कर, जमकर वीकेंड को कोसा करते हैं। फिर नयी कहानियां बनायीं जाती हैं, किस्से गढ़े जाते हैं, अपने वीकेंड को, दुसरे से बेहतर बताये जाने का, हर भरसक प्रयास किया जाता है, और इस तरह हफ्ता दर हफ्ता, वीकेंड का लीजेंड आगे बढ़ाया जाता है।

Monday, January 18, 2016

ये सर्दी

ये सर्दी कैसी सर्दी,
ये सर्दी बैरन सर्दी,
लंबे नुकीले नाखूनों वाली,
भीतर तक चीर कर जाती सर्दी,
ओस की बूँदों को तब्दील कर,
कोहरे का जाल बिछाती सर्दी,
पारे को नीचे गिरा,
शीत लहर के बाण चलाती ये सर्दी,
ये सर्दी कैसी सर्दी,
ये सर्दी बैरन सर्दी||

अपने ही आपे मे,
इठलाती बलखाती सर्दी,
मतलब की इस दुनिया में,
आदमी को आदमी वैसे ही नही दिखता,
अपने संग धुन्ध और कोहरा लाकर,
परेशानी को और बढ़ाती सर्दी,
ये सर्दी कैसी सर्दी,
ये सर्दी बैरन सर्दी||

ये सर्दी कभी अच्छी हुआ करती थी,
जब हमारी सर्दी की छुट्टी हुआ करती थी,
सुबह आलू-पराठा के संग चाय हुआ करती थी,
दोपहर मे उजली धूप हुआ करती थी,
जब भी बाहर निकला करते थे,
स्वेटर, जैकेट, जूते,
सर पर टोपी हुआ करती थी,
माँ इतना ख्याल रखा करती थी,
कि आज बैरन लगने वाली सर्दी,
कभी हमारी दोस्त हुआ करती थी||

माँ के हाथ से बने,
गर्मा-गर्म खाने की याद दिलाती ये सर्दी,
घर की चार दीवारी की,
गर्माहट का मोल बताती ये सर्दी,
सूनेपन का, अकेलेपन का,
बेदर्दी से एहसास कराती ये सर्दी,
ये सर्दी कैसी सर्दी,
ये सर्दी बैरन सर्दी||

काम को बोझ बनाती ये सर्दी,
नींद से बेजाँ प्यार कराती ये सर्दी,
पानी से बैर कराती ये सर्दी,
काम पर जाते वक़्त,
रास्ते को जंग का मैदान बनाती ये सर्दी,
प्रकृति के कोमल निर्मल हृदय को,    
पत्थर सा कठोर बताती ये सर्दी,
ये सर्दी कैसी सर्दी,
ये सर्दी बैरन सर्दी||

Tuesday, January 12, 2016

एक बार फिर

एक बार फिर दिल ज़ोर से धड़का है,
एक बार फिर साँस थमी है,
एक बार फिर नब्ज़ टटोली है,
एक बार फिर खुद को ज़िंदा पाया है,
एक बार फिर अपने हाथों की लकीरों को निहारा है,
एक बार फिर अपनी किस्मत को पुकारा है||

एक बार फिर आईने मे खुद को निहारा है,
एक बार फिर खुद से मुलाक़ात हुई है,
एक बार फिर कुछ पाने की तमन्ना है,
एक बार फिर कुछ खोने का डर है,
एक बार फिर फरियाद में हाथ उठा है,
एक बार फिर सजदे मे सर झुका है|

एक बार फिर शाम ने लालिमा छितराई है,
एक बार फिर सुबह ने उम्मीद जगाई है,
एक बार फिर फूलों ने खुशबू बिखराई है,
एक बार फिर चाँदनी ने ठंडक पहुँचाई है,
एक बार फिर रिश्तों में सच्चाई है,
एक बार फिर दुनिया में अच्छाई है,
एक बार फिर काली रात भागी है,
एक बार फिर नयी सुबह जागी है||

एक बार फिर लहू ने रफ़्तार पकड़ी है,
एक बार फिर कुछ कर गुजरने की मान मे आई है,
एक बार फिर जीने को आमादा हूँ,
एक बार फिर उम्मीद मे हूँ कि सवेरा होगा,
एक फिर उम्मीद में हूँ कि कल मेरा होगा||

Saturday, September 19, 2015

ये शामें

ये शामें अक्सर कशमकश मे गुज़रती हैं,
जद्दोज़हद में गुज़रती है,
कभी बिना रुके, बिना थमे, दबे पाँव,
चुपचाप सरकती ज़िंदगी से,
कुछ पल अपने लिए भी चुरा लेने की कोशिशों  में,
कभी खुद को खोजने में,
तो कभी अपनों को तलाशने में,
कभी ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबी,
ख्वाहिशों की सिसकियों को सुनने में,
तो कभी अपने ही अंदर घर चुके आँधियारे से लड़ने में,
बस कुछ इस तरह ही गुज़रती हैं ये शामें|

                                                                       ये शामें हर रोज़ अपने घर से निकलती हैं,
                                                                       कभी उस मंज़िल की तलाश में,
                                                                       जहाँ पंहुच कर सुकून मिले,
                                                                       तो कभी उस मंज़र की फिराक़ मे ,
                                                                       जिसे देख,
                                                                       हर ख्वाब मुकम्मल लगे,
                                                                       तो कभी उस पल, उस लम्हे की आस मे,
                                                                       जिसे जी कर ज़िंदगी पूरी सी लगे|


कभी कभी ये शामें सुकून की तलाश में,
यादों के गलियारों मे भी जाया करती हैं,
कभी बचपन की मासूमियत, बेफिक्री को,
नज़दीक से निहारा करती हैं,
तो कभी यारों के संग,
महफ़िल जमाया करती हैं,
कभी महबूब की गलियों मे गुज़रती हैं,
तो कभी माँ की गोदी में सर रखकर,
लोरियाँ सुनकर आया करती हैं|

                                                                     ये शामें कुछ बेचैन सी रहती हैं,
                                                                     अक्सर बेचैनी का सबब भी तलाशा करती हैं,
                                                                     दरअसल,
                                                                     ये गुमनामी के अंधेरों से डरती हैं,
                                                                     डरती हैं,
                                                                     कि इनके गुज़र जाने के बाद,
                                                                     इन्हे अतीत के दरिया मे बहा दिया जाएगा,
                                                                     इन्हे किसी अंधियारी कोटरी मे,
                                                                     किसी बेनाम बक्से मे बंद कर,
                                                                     दफ़ना दिया जाएगा,
                                                                     इन्हे डर ये भी है कि,
                                                                     कहीं इनका हश्र भी उन अनगिनत शामों जैसा ना हो,
                                                                     आज जिनके न तो आने का चर्चा है,
                                                                     ना ही जाने का ज़िक्र,
                                                                     ना तो उनके अस्तित्व का पता है,
                                                                     ना ही वजूद का ठिकाना,
                                                                     इसीलिए, इन शामों में,
                                                                     एक खलिश सी रहती है,
                                                                     ये शामें कुछ बेचैन सी रहती है|

ये शामें भले ही गमज़दा हैं,
पर इन्होने उम्मीद का दामन छोड़ा नही है,
ये थकी हैं, हारी नहीं हैं,
इन्हे यकीं है कि,
ये अपनी मंज़िल पाएँगी,
लाखों की भीड़ मे,
अपना एक अलग मुकाम बनाएँगी,
इनकी दास्तां लोगों के ज़हन में,
महक बनकर एक अरसे तक रहेगी,
गर ये दफ़ना भी गयी तो,
उस मिट्टी क़ी पैदाइश,
पौधे का फूल बनकर,
इस दुनिया को फिर महकाएँगी,
गर इस ज़ुस्तज़ू मे,
ये शामें गुज़र भी गयी तो,
अपना आधूरा ख्वाब पूरा करने,
ये शामें फिर आएँगी,
ये शामें फिर आएँगी|

Monday, March 19, 2012

चाहत

तू शमा मैं परवाना,
तेरे पास गया तो जल जाऊँगा,
पर तुझसे दूर हुआ तो परवाना कैसे कहलाऊंगा,
मुझे जान कौन पाएगा,
पहचान कौन पाएगा,
गुमनामी के साए मे खो जाऊँगा,
हज़ारों की भीड़ मे,
मैं भी उनमे से एक हो जाऊँगा||
                          
                                                                तुझसे ही मेरा वजूद है,
                                                                मेरे हर ज़र्रे मे तू मौजूद है,
                                                                तुझसे ही मेरा नाम है,
                                                                 तू ही मेरा मुकाम है||

जलेंगे तो एक दिन सभी,
आज नही तो फिर कभी,
पर, तेरे पास आकर,
तुझमे समाकर,
तेरे एहसास को पाकर,
सपने को हक़ीक़त बना जाऊँगा,
सौ जन्म एक साथ जी जाऊँगा,
और, मरते मरते भी ,
ज़िंदा होने का एहसास कर जाऊँगा||
                                                            
                                                                लोग मुझे नादान कहेंगे,
                                                                मेरी बेवकूफी पर हँसेंगे,
                                                                पर, ये नादानी नही ,दीवानापन है,
                                                                जो सागर मे समाती नदी जानती है,
                                                                कभी कभी किसी को पाने के लिए,
                                                                अपने आप को दाँव पे लगाना पड़ता है,
                                                                खुद की हस्ती मिटानी पड़ती है||
कोई कितना भी मनाए,
कोई कितना भी समझाए,
मुझे तेरी आग मे जलना है,
मुझे तुझमे फ़ना होना है,
यही मेरी हसरत है,
यही मेरी किस्मत है||















Thursday, March 17, 2011

My Love


oh dear,i m ready to do anything ,
which makes u to come to me,
i wont say i'll turn the world upside down,
turn day into night to fill stars in the sky,
draw rainbow on the canvas up in the high,
but what i do have to say is,
i know you for a while,
and i know,
what makes you happy,
what makes you sad,
what makes you sublime,
and 
what makes you mad,
what is your taste and favourite movie star,
and above all my dear,
i know who you are?

my love, i am no poet,
i may sound amateur,
but
my love is not,
i have loved you for long,
imagined you in every love song,
loved you through various seasons
and my love, 
i have loved you for infinite reasons.

oh dear ,i may not be 
smart enough for you to complement,
but i promise i am man enough,
to stay besides you in every tough moment,
i'll toil hard and i will try,
to shield you from any situation,
which can make u cry.

i'll treat you like a princess,
love you everyday,
and
i'll do anything in the world,
to make you stay,

i have no tricks to play,
no moves to make,
no steps to follow,
because my pretty,love is not a game,
for me love is life,
nothing less ,nothing else!!